शनिवार, 9 मई 2009

// लाल कृष्ण आडवाणी के सितारें गर्दिश मैं...हार की संभावना ..सुनिश्चित

लगभग साढे पन्द्रह लाख आबादी वाले अहमदाबाद की गांधी नगर संसदीय सीट पर इस बार लालकृष्ण आडवाणी का मुकाबला कांग्रेस के सुरेश पटेल से है...भा.जा .पा के घोषित प्रधान मंत्री पद के उम्मीदवार आडवाणी जी ने इस क्षेत्र मैं १५ सालों से लगातार जीत हांसिल की है .और हर चुनावी - जीत के बाद उनके दो -ढाई लाख वोट बढ़ जाते हें.गांधी नगर सीट का इतिहास गवाह हे की उनके सामने अच्छे और बढे ,नामी-गिरामी दिग्ज्जों की भी बुरी हार हुई है ...गाँधी नगर क्रीम एरिया है ,यहाँ अधिकाँश पढेलिखे और लब्ध-प्रतिष्ठीत लोगों की आबादी है और वे जानतें हैं की उन्हें क्या करना होगा -किसे चुनना होगा ...की जो उनके हित मैं होगा. इस बार आडवाणी के भाग्य का फैसला वे कर चुके हें,अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ज्योतिषों की गणना -भविष्यवाणी और जनता ने भी अपने नेता का चुनाव कर लिया है ...और अब मुश्किल से सात दिन मैं चुनाव परिणाम आ भी जायेंगे ...इस बार आडवाणी जी की हार सुनिक्षित है यदि जीत जातें हैं तो भी प्रधान मंत्री बन ने के कोई आसार नही . ..उनके सितारें गर्दिश मैं हैं भले ही वो अपने को देश भर मैं एक उदारवादी नेता के रूप मैं पेश कर रहें हों ...बतौर युवाओं का नेता भी---बतलाने-जतलाने मैं कोई कोर-कसरनही छोड़ रहें हों ...अब इस बात से कोई फर्क नही पड़ता की उन्होंने देश के लिए कुछ किया या नही ..फिलवक्त वे २१ वीं शाताब्दी को भारत की शताब्दी बनाने,गरीबों को कंप्यूटर शिक्षा देने,लड़कियों को अनिवार्य शिक्षा...और शिक्षा के समुचित अवसर देने का वादा कर चुकें हें ......तो क्या भारत को आडवाणी जैसे बूढे बनाम युवा या युवा बनाम बूढे प्रधान मंत्री की जरूरत होगी चुनाव बाद निशिचित ही कुछ और मुद्दे उठेंगे ...इस नए अवतार [एक बड़ी राजनैतिक पत्रिका मैं अति रंजना शब्द शैली मैं उनका व्यख्यान किया गया है ]को परिणाम के बाद संन्यास लेते .हताश होते हुए भी देखा जा सकेगा ...मराठी मैं एक कहावत है ..दिसतो तसा नसतो...जैसा दिखाई देता है वैसा नही होता ..तो क्या आडवाणी के सन्दर्भ मैं कहा जा सकता है की वो जितना और जैसा जाने जाते हैं क्या उतने और वैसे हें जितना की उन्हें पेश्तर किया जारहा है, ---या नही ..चुनाव परिणाम के बाद ज्यादा ठीक से समझे जा सकेंगे ....फिलहाल उनका सामना कर रहें सुरेश पटेल ..कलोल तालुका के दस साल से एम् एल ऐ हें उनकी छवि साफ-सुथरी है इस क्षेत्र मैं तीन लाख लोग पाटीदार समाज के हें और इस वक्त वे सभी आडवाणी के विरोध मैं हें यदि सुरेश पटेल जीततें हें तो इस अमूल्य जीत के बाद उनका कद तो बढेगा ही साथ ही वो पार्टी मैं सिरमौर की हेसियत वाले नेता भी बन जायेंगें ...जीत के बाद सुरेश पटेल की प्राथमिकताओं मैं अहमदाबाद को जोड़ने वाले सभी गावों मैं सड़क -पानी प्राथमिक शिक्षा ,स्कूलों मैं सुधार की रहेगी.. जैसा उन्होंने बताया ....इस समाज के वर्तमान मैं तीन लाख परिवार अमेरिका मैं हैं, चुनाव प्रचार अभियान के दौरान १०० से ज्यादा लोगों ने भारत आकर सुरेश पटेल का होंसला आफजाई की थी...पटेल समाज के अध्यक्ष और जबरदस्त राजनैतिक हस्तक्षेप रखने वाले स्थानीय रहवासी डॉ। मफत लाल पटेल ने बताया ...दर- असल अधिकाँश लोगों की नापसंदगी लालकृष्ण आडवाणी के लिए क्यों है ?...पहली तो बीते पन्द्रह वर्षों मैं आडवाणी अपने क्षेत्र मैं ना तो कभी आए ना अपने क्षेत्र के लिए कुछ उल्लेखनिय किया --ना अपने क्षेत्र की जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरे ...दूसरे गुजरात मैं हुए अन्याय के खिलाफ लोकसभा सदस्य होने के नाते ना तो कुछ कहा -ना किया ....तीसरे हाल ही मैं आशाराम बापू के आश्रम मैं दो बालकों की ह्त्या के मामले मैं [तंत्र-मन्त्र हेतु ]उनके प्रति मिली भगत होने का संदेह ....जो भी हो इन चुनावों मैं जो भी तस्वीर उभरे लेकिन ...देश भर के पत्र-पत्रिकाओं मैं जो उनकी तस्वीरें प्रकाशित हुई हें वो एक हताशा और उत्साह के अतिरेक भरा ..मिला -जुला चेहरा है ...आत्म विशवास की झलक वहां हल्की है अन्यथा सन्यासी क्या यूँ ही कोई हो जाना चाहेगा .....
अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ज्योतिष जगदीश मोदी,डॉ मफत लाल पटेल स्थानीय रहवासी यों से बात चीत के आधार पर ....अहमदाबाद से लौटकर

16 टिप्‍पणियां:

Kishore choudhary ने कहा…

आप सचमुच बड़े खुले दिल और दिमाग से दुनिया की घटनाओं को देखती हैं, जबकि इस दौर में हर कोई किसी न किसी के प्रति सापेक्षता का भाव ग्रहण कर ही लेता है. आपने ज्योतिष जैसे विषय को भी खोजपरक तरीके से अपनी पोस्ट में शामिल कर लिया. बधाई !

रवि सिंह ने कहा…

आप क्या एनडीटीवी से हो?
एसी बेपर की तो सिर्फ एनडीटीवी वाले ही उड़ा सकते हैं
या ये हंसी मजाक का लेख है?
कृपया स्पष्ट करें

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

आपने अच्छा विष्लेषण किया है. अब थोडे समय बाद ही सब पता चल जायेगा.

रामराम.

अक्षत विचार ने कहा…

पिछले चुनावों में सभी ज्योतिष बाजपेयी को परधानमंत्री बना रहे थे परन्तु परिणामों के बाद मनमोहन बन गए

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

थोडे दिनों में पता चल ही जाएगा कि ऊंट किस करवट बैठता है....खैर लगता है कि आपने बहुत परिश्रम से इस पोस्ट को तैयार किया है.

विनय ने कहा…

सियासत में मुझे दिलचस्पी नहीं है क्योंकि इसे बढ़े क़रीब से देखा है किन्तु आपका लेखन सशक्त है

संगीता पुरी ने कहा…

बढिया लिखा है .. देखते हैं ।

IRFAN ने कहा…

aapko ek bebak lekh ke liye badhaaee.shukra hai advaniji ke baare me itna sab likhne per abhi tak aapko bhava briged ne gaaliyon vali tippaniyan nahin bheji hain.aapko shubhkaamnayen.isi tarah apni bebaak rai deti rahiye.

Ravi Singh ने कहा…

श्री इरफान, ये भगवा ब्रिगेड द्वारा गालियों की बात कैसे लिख गये जी?
जैसे छोटे बच्चे मां का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिये "लग्गई, लग्गई" कह कर रोते हैं वैसे ही कुछ तीस्ता छाप सेकूलरिया लोग खुद अपने ब्लाग पर खुद को बेनामी गालियां देते रहते हैं ताकि उनके ब्लाग को लोकप्रियता मिले और सहानुभूति भी

शेष लेख बेबाक है या बेपर की उड़ान है एक सप्ताह में पता चल जायेगा

वेद रत्न शुक्ल ने कहा…

दिल बहलाने को गालिब खयाल अच्छा है...
वैसे, आपका सोनिया, राहुल आदि के बारे में क्या ख्याल है?

दिगम्बर नासवा ने कहा…

लेख अच्छी तरह से लिख्स हुवा है............बस इतना ही ठीक है ........... कई जगह मोहग्रस्त , पूर्वनियोजित मानसिकता का परिचय मिलता है

Vidhu ने कहा…

इरफान जी दिगंबर जी आप सभी का शुक्रिया ॥रवि जी आप लेख को दोबारा पढ़े...शीर्षक में ही संभावना शब्द है ...ये एक रिपोर्ट है ..जो लोग जन सामान्य की अगुआई करतें हैं उनके लिए जवाबदेही भी बनती हैं ..ब्लॉग माध्यम है मेरे पास आपकी -उनकी अपनी कहने सुनने के लिए ...हमें इसी जमीन पर रहना है ।आड़ वाणी जी प्रधान मंत्री बने ना बने इससे मेरी सेहत पर कोई असर नहीं होगा .अपने अनुभव से जो लिखा वो सुना गया जमीनी हकीकत का एक सच है और में कोई ज्योतिषी नहीं वो बने ॥प्रधान मंत्री इस देश के ॥चलिए इसके लिए आप को पहले से ही बधाई । किशोर जी आपका भी शुक्रिया ताऊ जी ,अक्षत जी वत्स विनय जी संगीता जी आपका भी आभार vidhu..

संजय बेंगाणी ने कहा…

गाँधीनगर हमारा मत क्षेत्र है जी. आप और आपके ज्योतिषी गलत साबित होंगे. लगी शर्त?

अगर सितारे ही तय करते है तो चुनाव करवाएं ही क्यों? ज्तोतिषि से ही पूछ कर प्र.म. तय कर सकते है.

तुक्का शास्त्र को छोड़ कर वैज्ञानिक विशलेषण होता तो मजा भी आता.

ali ने कहा…

" इस बार आडवाणी जी की हार सुनिक्षित है यदि जीत जातें हैं तो भी प्रधान मंत्री बन ने के कोई आसार नही . ..उनके सितारें गर्दिश मैं हैं भले ही वो अपने को देश भर मैं एक उदारवादी नेता के रूप मैं पेश कर रहें हों "

परिणाम आ चुके हैं ! आपका आकलन और उन ज्योतिषियों की भविष्यवाणी सही निकली ! अब इंतजार है कि आलेख पर पहले टिप्पणी कर चुके लोग क्या कहते हैं ?

अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा…

इस बार तो भविष्यवाणी सच ही हो गयी।

आपने कविता जी के ब्लाग पर पूछा था कि मां की डिग्रियां किसकी कविता है? मैने ही वह कविता लिखी है। अब वह कथन में भी आ रही है।
ब्लाग पर स्वागत है।

P.N. Subramanian ने कहा…

हम आ नहीं पाए. आपका विश्लेषण बढ़िया रहा..