सोमवार, 8 दिसंबर 2008

मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार फ़िर सत्ता में... आत्मविश्वास, चुनौतियाँ और शिद्धत्त से किए काम जीत का सेहरा बने...

मध्यप्रदेश के इन चुनावों मैं भा पा ने ना केवल एतिहासिक जीत दर्ज की है वरन सम्मान जनक स्थिति भी हांसिल कर ली है खूबी यही है के टिकिट वितरण से लेकर चुनाव प्रचार ,प्रत्याशियों का मनोबल बढ़ाना,पत्रकारों से तालमेल बैठाना,अपोजिशन को फेस करना-जवाब देना और अपने आत्म विशवास को बनाय रखना,जेसे कारक तत्वों के चलते एक साफ चेहरे वाला व्यक्ति ,और उसकी कोशिशें अन्तत लक्ष्य पूर्ति मैं सफल रही ,जिस इमानदारी,सादगी और कर्मठता से गरीब की रोटी-पानी की चिंता शिवराज सिंह चौहान ने की ....ये जीत का सेहरा उसी का परिणाम है,कुछ वर्षों पूर्व देनिकभासकर के लिए जब मैंने शिवराज सिंह जी का इंटर व्यू किया था तब पाटी मैं उनकी कोई ख़ास पहचान नही थी ,तब भी वो चमक-धमक से दूर सादगी से नाता जोड़े हुए पैदल या सायकिल से घूम-घूम कर कार्य करते थे ,..तब ना उनके पास भीड़ थी ना पत्रकारों का हुजूम ,उसके बाद जब उन्होंने सत्ता संभाली तब भी वे सादगी से भरे हुए थे ,चुनौतियां भी थी ,तब इस कम अनुभवी किंतु आम आदमी से जुड़े नेता ने जल्द ही गरीबों की समस्याओं से साक्षात्कार कर उनकी मुश्किलों का तुंरत निदान और उपेक्षित वर्ग को आत्म विशवास दिलाने मैं जो दिलचस्पी और सच्चाई बरती,साथ ही शासन और आम जन के बीच सेतु बनकर काम करने के अपने अंदाज को जिस तरह बखूबी अमली जामा पहनाया काबिले तारीफ है,हर जागरूक आदमी जो अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर सोचता है उनकी जीत के प्रति आश्वस्त था,आंकडों पर ना जाएँ कुछ मुद्दे छोड़ भी दे तो पिछले तीन सालों मैं विशेषकर महिलाओं को संबल देने हेतु जो व्यवहारिक काम किए वो देश भर मैं किसी राज्य के खातें मैं नही होंगे, ३० जुलाइ २००२ को मुख्यमंत्री निवास पर महिला पंचायत और फिर समाज के कमजोर दलित तबके के लिए पंचायतों का सिलसिला,उनके प्रकरण ,समस्या, निदान ,सरक्षण, कानून ,उनकी मुश्किलों को सुनना ,जानना,ये सब किर्यान्वित होता रहा परिणाम सामने है लोगों ने उन्हें चुना,लाडली लक्ष्मी जैसी अनूठी योजना,ने गरीब स्त्री मैं एक ऊर्जा और आत्म विशवास का संचार किया,ये योजना थी भी इसलिए ,ताकि स्त्री के चेहरे पर गरीबी ना दिखे महिला सशक्तिकरण ,गुणात्मक स्वास्थ्य सेवायें,क्षमता भर विकास,रोजगार एवं आय बढाने के अवसर बढाना,जेंडर आधारित बजट व्यवस्था ,श्रमिक महिलाओं के हितों का संरक्षण यौन प्रतारणा की रोकथाम ,वन जल पर्यावरण, इनमें भागीदारी को ख़ास अहमियत दी गई एवं कठिन स्थिति वाली महिलाओं को सुविधाऔर उनके लिए संसाधन मुह्हिया करना ,सुचना संसार मैं तकनिकी भागीदारी,नीतिगत प्रावधानों की मोनिटरिंग मूल्यांकन प्रतिवेदन महिला निति के लिए कार्ययोजना मैं विभागों की जिम्मेदारी को शामिल किया गया, साथ ही कई पुरुस्कारों कोदेने के साथ आदिवासी निशाक्त्जानो मेधावी छात्रों ,किसान महापंचायतों के माध्यम किसानो को बिजली माफीदेश मैं पहला मत्स्य निति बनाने वाला राज्य बनाकर शिव सरकार ने मध्यप्रदेश की राजनीति मैं एक एतिहासिक मोड़ दिया है ,लेकिन अपने घोषणा पत्र मैं सरकार ने जो कहा है ..पानी बिजली जैसे मुद्दे उन्हें पूरा करने के लिए अब सरकार को जी-जान से जुटना होगा ,जहाँ -जहाँ असंतोष है वहां चौकसी के साथ काम करना होगा,सरकार से अब उम्मीदें और बढ़ जायेंगी लेकिन अब उनके पास मौका भी है, और समय भी ,यही नही ये चुनाव एतिहासिक ही नही आगामी लोकसभा चुनावों के लिए निर्णायक भी सिद्ध होंगे कबीर द्वारा परिभाषित जोगी ,[सब सिद्ध्ही सहज पाइये ,जो मन जोगी होई ]शिव राज सिंह को फिर भी याद रखना होगा सच्चाई से की अन्तिम आदमी कोयाद रखना अपने अन्दर के विचार को और अपनी मनुष्यता को बचा कर रखना है नही तो सत्ता मैं रह करभ्रष्ट तो होना ही होता है सता की अपनी मजबूरियाँ होती है और मतदाता की भी ,....आमीन ,जिसको चाहे शोहरत दे ये करम उसी का है

10 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

आप ने बहुत सुंदर ढग से तारीफ़ की है इन की, मुझे इन के बारे कुछ नही मालुम.लेकिन अगर यह सब सच है तो काश सभी राज्यो मे ऎसे ही नेता हो.
धन्यवाद

Udan Tashtari ने कहा…

सब सिद्ध्ही सहज पाइये ,जो मन जोगी होई

-शिव राज सिंह पुनः ऐसे ही बने रहें-भविष्य उनका बहुत उज्जवल है. अच्छा आलेख.

Jimmy ने कहा…

kiyaa baat hai ji bouth he aache tara varnan kiyaa aapne good


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shruti ने कहा…

शिवराज, की धवल छवि ने भाजपा को मध्यप्रदेश की सत्ता में वापस पहुँचाया है। लेकिन लोकतंत्र का एक दुखद पहलू यह है कि इस बार अधिकांश चुनावों में जनता ने मुद्दों पर नहीं बल्कि चेहरों पर वोट दिया है। मध्यप्रदेश ही नहीं दिल्ली में भी शीला के चेहरे ने, छत्तीसगढ़ में रमण सरकार की छवि ने, राजस्थान में वसुंधरा राजे की कुछवि ने हर जगह जनता ने चेहरा ही देखा......जबकि आजादी के 60 साल बाद हमें चेहरा नहीं मुद्दों का, तकलीफों का हल चाहिए। मुझे लगता है अब हमें एक स्वर में बुलंद होकर कहना चाहिए कि अब विकासशील का ठप्पा नहीं बल्कि हमें विकसित राष्ट्र का दर्जा चाहिए.....देंखे सत्ता के सेमीफाइनल के बाद सत्ता के फाइनल का रुख चेहरा होता है या मुद्दा?

बेनामी ने कहा…

राज दरबारों में भाट - चारण हुआ करते थे । सरकारी प्रेस नोट को आलेख की शक्ल देकर आपने नए दौर में इस काम को बखूबी अंजाम दिया है । आपकी इस सेवा का प्रतिफ़ल भी निश्चित ही बेतहरीन और मीठा मलाईदार रहेगा । अगले पांच साल मौज लूटने का बंदोबस्त करने के लिए किया गया ये प्रयास फ़लीभूत हो ईश्वर से यही कामना है ।

Dr. Chandra Kumar Jain ने कहा…

अन्तिम आदमी कोयाद रखना अपने अन्दर के विचार को और अपनी मनुष्यता को बचा कर रखना है

सही है पर कठिन भी बहुत,
पर असंभव भी नहीं
प्रस्तुति अच्छी लगी.
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शुभकामनाएँ
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

Suresh Chiplunkar ने कहा…

बेनामी भाई, कुंठा क्यों निकाल रहे हो यार, डाकू और चोर में से किसी एक को चुनना था सो प्रदेश की जनता ने चोर को चुन लिया… क्या दिक्कत है

DUSHYANT ने कहा…

bhalaa lagaa aapke yahan aakar ...

bahadur patel ने कहा…

kya bat hai benami bhai. ab achchhi tippani dena ho to blag par yahi sab kuchh chalata hai. lekin benami bhai tippani lajawab hai.itana bhi kya aankh mundkar tarif karana.samjh me nahin aa raha hai inko kaise samjhaya jaye. apani tippani nam ke sath to apako dena tha. aap akele nahin hai bhi.muktibodh se urja lo :-
abhivyakti ke khatare uthane hi honge,dhahane hi honge math aur gadrh sab.
mujhe samjh me nahin aata hai. ki tarif ki bhi ek had hoti hai.

BrijmohanShrivastava ने कहा…

धन्यवाद