भारतीय यहूदी स्त्री और दोहरी सांस्कृतिक चेतना
भारतीय यहूदी स्त्री एक अद्भुत सांस्कृतिक संगम की जीवित प्रतीक है। वह एक साथ दो परंपराओं की वाहक है—एक ओर प्राचीन Judaism की आध्यात्मिक विरासत, दूसरी ओर भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन की जीवंत धारा। उसकी पहचान किसी विभाजन की नहीं, बल्कि संतुलन और संवाद की पहचान है।
घर की देहरी पर दो संसार
भारतीय यहूदी परिवारों में स्त्रियाँ धार्मिक परंपराओं की संरक्षिका रहीं। सब्बाथ के दीप जलाना, तोरा के पर्वों की तैयारी करना, बच्चों को हिब्रू प्रार्थनाएँ सिखाना—ये सब उनकी भूमिका का हिस्सा था।
साथ ही, वही स्त्री मराठी या मलयालम बोलती, साड़ी पहनती, पड़ोस की स्त्रियों के साथ भारतीय त्योहारों की खुशियाँ बाँटती।
यह दोहरी चेतना किसी संघर्ष से नहीं, बल्कि सहज सह-अस्तित्व से बनी थी। वह जानती थी कि भारतीय होना और यहूदी होना परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
शिक्षा और सार्वजनिक जीवन की ओर
मुंबई, पुणे और कोच्चि में यहूदी महिलाओं ने विद्यालयों और सामुदायिक संस्थानों के संचालन में नेतृत्व किया। उन्होंने आधुनिक शिक्षा को अपनाया और बेटियों को भी शिक्षित किया।
भारतीय सिनेमा के आरंभिक दौर में जब समाज स्त्रियों की सार्वजनिक उपस्थिति को लेकर संकोच करता था, तब Sulochana, Nadira, और Pramila जैसी यहूदी अभिनेत्रियों ने परदे पर आकर एक नई राह बनाई।
उन्होंने केवल अभिनय नहीं किया—उन्होंने स्त्री की स्वतंत्र उपस्थिति को सामाजिक स्वीकृति दिलाई।
स्मृति और प्रवासन
1948 में Israel की स्थापना के बाद अनेक भारतीय यहूदी परिवार वहाँ चले गए। पर भारतीय यहूदी स्त्री अपने साथ मसालों की खुशबू, मराठी गीतों की लय और भारतीय मानस की कोमलता भी ले गई।
इस प्रकार वह केवल प्रवासी नहीं बनी—वह स्मृतियों की संरक्षिका बनी।
इज़राइल में भी उसने “भारतीय यहूदी” पहचान को जीवित रखा।
दो संस्कृतियों के बीच सेतु
भारतीय यहूदी स्त्री की दोहरी सांस्कृतिक चेतना हमें यह सिखाती है कि पहचान कठोर दीवार नहीं होती—वह एक पुल भी हो सकती है।
उसने अपने जीवन से दिखाया कि विविधता में एकता केवल नारा नहीं, एक जीवित अनुभव है।
भारतीय यहूदी स्त्री का इतिहास केवल अल्पसंख्यक समुदाय की कहानी नहीं है; यह भारतीय बहुलता, सहिष्णुता और सांस्कृतिक समन्वय की कहानी है।
वह अपने भीतर दीप की तरह दो लौ जलाए रखती है—
एक अपनी आस्था की, दूसरी अपने देश की।
और दोनों मिलकर उसकी पहचान को उजास से भर देती हैं। ✨


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें